MSP (Minimum Support Price) क्या है? समझिए विस्तार से
प्रस्तावना
भारतीय कृषि व्यवस्था में MSP (Minimum Support Price) एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो किसानों को न्यूनतम लाभ सुनिश्चित करने और कृषि उत्पादों की कीमतों में अस्थिरता को नियंत्रित करने में मदद करता है। हालांकि, समय के साथ मांगें बढ़ीं और किसानों ने MSP की गणना में सुधार की मांग उठाई। इसी संदर्भ में “C2+50%” फॉर्मूले वाले MSP ने सबकी नज़रें अपनी ओर खींची हैं। इसलिए, आइए क्रमबद्ध रूप में समझते हैं कि MSP क्या है, C2+50% का औचित्य क्या है, किसानों की मांगें क्या हैं, वर्तमान सरकार क्या दे रही है और उन्हें क्या मिलना चाहिए। इसी संदर्भ में, कृषि नीति विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट और टिप्पणियों के माध्यम से MSP से संबंधित वर्तमान संकट और उससे निपटने का रास्ता स्पष्ट किया है।
उनकी बातों में विशेषकर यह जोर नजर आता है कि भारतीय किसान निराश्रित छोड़ दिए गए हैं—“Bhagwan bharose” जैसे वह कहते हैं ।
MSP क्या है और इसकी गणना कैसे होती है?
MSP (Minimum Support Price) वह न्यूनतम मूल्य है जिसे सरकार किसानों को गारंटी देती है, खासकर उन फसलों के लिए जो खरीफ और रबी मौसम में उगाई जाती हैं। इसका उद्देश्य किसानों को लाभ देना और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। MSP आमतौर पर बीज बुवाई से पहले घोषित किया जाता है, जिसे CACP (Commission for Agricultural Costs and Prices) की सलाह के आधार पर तय किया जाता है ।
CACP MSP निर्धारित करते समय निम्न कारकों पर विचार करता है:
मांग और आपूर्ति,
उत्पादन लागत,
घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजार का रुझान,
फसलों के बीच मूल्य समानता,
कृषि और गैर-खाद्य वस्तुओं के बीच व्यापार स्थितियों का अनुपात,
और न्यूनतम 50% लाभ मार्जिन ।
उल्लेखनीय है कि MSP केवल सुझावात्मक है—किसानी इसका कानूनी अधिकार नहीं होता, बल्कि सरकार की नीति के अनुसार लागू होता है ।
A2, A2+FL और C2 लागत मानदंड
किसानों की लागत को समझने के लिए हमें तीन मूलभूत पैमाने जानने जरूरी हैं:
A2: इसमें सीधी नकद लागत आती है—बीज, खाद, उर्वरक, मजदूरी आदि।
A2+FL: इसमें A2 के साथ परिवार की अप्रत्याशित (unpaid) श्रम की लागत भी शामिल होती है।
C2: यह सबसे व्यापक लागत होती है—जिसमें A2+FL के अलावा अपनी जमीन का रिकॉर्ड, मशीनरी और पूंजी पर किस्त (interest) और किराया शामिल होता है ।
सामान्यतः सरकार MSP को A2+FL लागत + 50% लाभ के आधार पर तय करती है। लेकिन किसानों का कहना है कि उन्हें वास्तविक कीमत चाहिए, जो C2+50% के आधार पर होनी चाहिए।
Swaminathan आयोग और C2+50% फ़ॉर्मूला
2006 में स्थापित राष्ट्रीय किसान आयोग, जिसका नेतृत्व डॉ. M. S. Swaminathan ने किया था, ने MSP के लिए C2+50% का फॉर्मूला सुझाया था। यानी, MSP = C2 + 50% × C2 (1.5 × C2) । इसका उद्देश्य किसानों को शानदार लाभ के साथ न्यायपूर्ण मूल्य उपलब्ध कराना था।
हालांकि, यह फॉर्मूला अब तक लागू नहीं हुआ। कई किसान संगठन और किसान नेता—जैसे AIKS—इस फॉर्मूले को कानून की शक्ल देने की मांग कर रहे हैं ।
क्या MSP वर्तमान में C2+50% को पूरा कर रहा है?
कुछ राज्यों में, विशेषकर पंजाब और मध्य प्रदेश में, वर्तमान MSP वास्तव में C2 लागत का 50% अतिरिक्त प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, गेहूं के लिए MSP ₹2,275 प्रति क्विंटल था, जबकि C2 लागत ₹1,503 थी — इससे किसानों को 51% लाभ प्राप्त हुआ ।
वहीं, मसूर, सरसों, और रापसी जैसी फसलों के लिए भी कुछ राज्यों में MSP बेहतर ऑफर करता है जैसे सरसों-राय में 81% तक लाभ मिला ।
हालांकि, यह लाभ सभी राज्यों और फसलों के लिए सार्वभौमिक रूप से उपलब्ध नहीं है। कई किसानों को C2+50% लाभ नहीं मिल पा रहा है और MSP संरचना में असंतुलन बने हुए हैं।
किसानों की मांगें — क्या चाहते हैं वे वास्तव में?
किसानों की मौलिक मांगें निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर आधारित हैं:
- MSP के लिए कानूनी गारंटी — यानी MSP को एक कानून बनाकर उसे हर फसल और हर किसान के लिए लागू किया जाए, ना कि सिर्फ सुझाव मात्र के तौर पर रह जाए ।
- C2+50% फार्मूला को अपनाना — सरकार को MSP को C2 लागत पर 50% जोड़कर तय करना चाहिए, जैसा कि Swaminathan आयोग ने सुझाव दिया था ।
- CACP का स्टैच्यूटरी (कानूनी) दर्जा — उन्हें और अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए CACP को एक स्थापित और जवाबदेह संवैधानिक संस्था बनाना चाहिए ।
- विस्तारित खरीद और संरचनात्मक सुधार — MSP केवल कुछ फसलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सब्जी, फल, अन्य फसलें भी खरीद में शामिल होनी चाहिए ।
- ऋण माफी, ऋण सुविधाएं और बोनस — खेती लागत बढ़ने के कारण कई किसान ऋणबंधन की ओर मजबूर हैं। वे चाहते हैं कि सरकारी ऋण माफी, आसान बैंकों तक पहुंच, और बोनस योजनाएं उपलब्ध हों ।
सरकार ने MSP में क्या बदलाव किया है – वर्तमान स्टेटस
हाल ही में सरकार ने Kharif सीज़न 2025-26 के लिए 14 फसलों के MSP में वृद्धि की घोषणा की है। उदाहरण के लिए:
धान (पैडी) का MSP ₹2,369 (₹69 की वृद्धि),
मक्का ₹2,400 (₹175 की वृद्धि),
मूंग ₹8,768 (₹86 की वृद्धि),
कपास (Medium staple ₹7,710, Long staple ₹8,110, ₹589 की वृद्धि each) ।
सरकार का दावा है कि MSP से कम से कम 50% लाभ सुनिश्चित हुआ है—कुछ फसलों में यह लाभ 59–63% तक पहुँचता है, जैसे मक्का और बाजरा में ।
विसंगतियाँ — किसानों का क्या कहना है?
फिर भी, किसान नेता और संगठन इस बढ़ोतरी से संतुष्ट नहीं हैं, क्योंकि:
यह MSP अभी भी C2+50% फॉर्मूले के अनुरूप नहीं है—सिर्फ A2+FL+50% पर आधारित है ।
कई किसान नेता कहते हैं कि इन्हें रियायत के तौर पर नहीं, बल्कि कानूनन हक के रूप में मिलना चाहिए ।
साथ ही, MSP बढ़ने से कई राज्यों में लाभ हुआ, पर कुछ राज्यों में MSP और C2 के बीच अंतर बहुत कम है — इसलिए सभी प्रदेशों में समान लाभ नहीं पहुंच रहा है ।
किसान आंदोलन और प्रदर्शन
इस मुद्दे पर किसानों ने कई बार बड़े आंदोलन किए हैं:
किसान लगातर प्रदर्शन कर रहे हैं, MSP की कानूनी गारंटी और C2+50% फार्मूला लागू करने की लड़ाई लड़ रहे हैं ।
तिरुचिरापल्ली (त्रिची) में किसानों ने पोस्टर लगाए, बैंक ऋण की समस्या, जल संकट, MSP दोगुना करने जैसी मांगें भी शामिल थीं ।
अब चुनावी मौसम में यह मुद्दा और भी संवेदनशील बना हुआ है—किसान चाहते हैं कि सरकार अपनी घोषणाओं को कानून बनाए और उन्हें स्थिर आय मिले।
आंकड़ों की दृष्टि से परिस्थिति
किसान नेताओं और संगठनों का मानना है कि वर्तमान MSP और वास्तविक उत्पादन लागत में अंतर बहुत अधिक है। उदाहरण के लिए:
पं जाब में धान के लिए Swaminathan के अनुसार MSP ₹2,501 होना चाहिए था, लेकिन वास्तविक MSP ₹1,888 था—इससे ₹613 प्रति क्विंटल कम मिला ।
इसी तरह, गेहूं के लिए भी ₹2,738 होना चाहिए था, लेकिन किसान ₹23,25 ही उठा पाए—₹413 प्रति क्विंटल की कमी हुई ।
ब्याज, जमीन का किराया, मशीनरी जैसे खर्च को शामिल करने पर यह अंतर और गहरा होता है ।
निष्कर्ष: क्या होना चाहिए?
अब सवाल यह है कि किसानों को क्या मिलना चाहिए—एक वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण से उत्तर स्पष्ट है:
- MSP को कानून का दर्जा देना चाहिए, ताकि हर किसान हर जगह MSP की गारंटी प्राप्त करे।
- C2+50% फार्मूला को अपनाया जाना चाहिए, जिससे किसान की वास्तविक लागत और मेहनत का न्यायपूर्ण लाभ सुनिश्चित हो।
- CACP को संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए, जिससे MSP नीति और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बने।
- MSP खरीद को बढ़ाया जाए, ताकि सभी प्रकार की फसलें (सब्जियों समेत) MSP के दायरे में आएं।
- किसानों की निरंतरता लागि समर्थन—ऋण, पेंशन, जीवन-भर का सहयोग आदि प्रदान किया जाए।
अंततः
MSP मुद्दा केवल आर्थिक विवाद नहीं है—यह भारतीय कृषि और किसान जीवन के कल्याण का आधार है। अगर MSP को कानूनी रूप से मजबूत किया जाए, C2+50% फार्मूला लागू किया जाए और पारदर्शी संरचना बनाई जाए, तो किसान की स्थिति में वास्तविक परिवर्तन आ सकता है। अन्यथा, कृषि संकट और आंदोलन ऐसे ही होते रहेंगे।
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Msp
MSP और C2+50% फॉर्मूला किसानों के लिए सिर्फ आर्थिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि उनके मेहनत का न्याय है। सरकार को इसे कानून का दर्जा देना चाहिए ताकि हर किसान को स्थिर आय और सम्मान मिल सके। यह भारतीय कृषि के लिए बेहद जरूरी कदम है।”
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किसानों को फसल का सही भाव मिलना चाहिए
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Yah Hai MSp ke bare mein Laga Agar msp kanuni Roop Se majbut Kiya Jaaye aur pardarshi sanrachna Banai Jaaye to Kisan ki sthiti mein Parivartan a sakta hai
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महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए धन्यवाद
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MSP: Govt’s safety net for farmers, ensuring fair prices.
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बहुत सूचनाप्रद और समयोचित लेख। MSP और C2+50% जैसे लागत-फॉर्मूले की गंभीर चर्चा बेहद जरूरी है, क्योंकि ये सीधे किसानों की आमदनी और जीविका को प्रभावित करते हैं। लेख ने A2, A2+FL और C2 जैसे लागत मानदंडों को स्पष्ट रूप से समझाया — और यह भी सही दर्शाया कि MSP अभी सुझावात्मक है, जबकि क्रियान्वयन और पारदर्शिता पर ही असली असर निर्भर करता है। अब ज़रूरी है कि सरकार पारदर्शिता के साथ MSP की गणना लागू करे, छोटे व सीमांत किसानों तक खरीद-केन्द्र और बाजार पहुँच बढ़ाए, और लागत-आधारित खरीद व बाजार हस्तक्षेप के भरोसेमंद तंत्र विकसित करे। किसानों की मांगों (जैसे C2+50%) पर सार्थक विचार करना समय की माँग है।
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Ye hamare kisano ki lia jaruri h to ye hona chahiye .agar kishan nhi honge to khana kha se ayega
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MSP reforms are crucial for farmers’ welfare
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भारतीय कृषी अवस्था मुख्य एक महात्पूर्णाचा संभव आहे
MSP मुद्दा केवल आर्थिक विवाद नहीं है—यह भारतीय कृषि और किसान जीवन के कल्याण का आधार है।
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MSP rate government ko 50% increase krna chahiye kisan aaj kal bahut problem ke h
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MSP rate insurance hone chahiye kisne ki help ke liye
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Msp bht acchi article hai isse bht madad milegi humare kisano ko or jinke yaha kheti hoti h unke liye bhi bht laabhdayak hai
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MSP मुद्दा केवल आर्थिक विवाद नहीं है—यह भारतीय कृषि और किसान जीवन के कल्याण का आधार है। अगर MSP को कानूनी रूप से मजबूत किया जाए, C2+50% फार्मूला लागू किया जाए
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Kisan sabse jyada mehnat karte Hain. Unko bhi sabse jyada profit hona Hi chahie
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किसानों को अपनी फसल का अच्छा भाव मिलना चाहिए बड़ी मेहनत करते हैं
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MSP को कानून का दर्जा देना चाहिए, ताकि हर किसान हर जगह MSP की गारंटी प्राप्त करे।
No Farmer No Food
Msp needs to be an active law